पूर्णियां। सदर थाना क्षेत्र के शीशाबाड़ी के सिकंदरपुर में 37 एकड़ जमीन के मुआवजे का मामला अब जिला प्रशासन के दरवाजे तक पहुंच गया है। जमीन से प्रभावित करीब 80 किसानों ने जिला पदाधिकारी को लिखित आवेदन देकर उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है। किसानों का कहना है कि वर्षों से जिस जमीन से उनके परिवार की रोजी-रोटी चलती थी, वह जमीन सरकार की ओर से सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंप दी गई, लेकिन इसके एवज में उन्हें बेहद कम राशि दी जा रही है।
2013 में BSF को सौंपी गई जमीन
किसानों के अनुसार, वर्ष 2013 में सरकार ने सिकंदरपुर स्थित करीब 37 एकड़ जमीन सीमा सुरक्षा बल को सौंप दी थी। प्रभावित किसानों का कहना है कि जमीन के बदले उन्हें मात्र 2 लाख रुपये प्रति बीघा के हिसाब से मुआवजा देने की बात कही जा रही है।किसानों का दावा है कि जिस जमीन की वर्तमान कीमत करोड़ों रुपये है, उसके लिए इतनी कम राशि दिया जाना उनके साथ न्याय नहीं है। किसानों ने प्रशासन से जमीन की वास्तविक कीमत का आकलन कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है।
80 किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट
इस जमीन से करीब 80 किसान प्रभावित बताए जा रहे हैं। किसानों का कहना है कि वे वर्षों से इसी जमीन पर खेती कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते आ रहे थे। खेती की जमीन हाथ से निकलने के बाद उनकी आय का मुख्य साधन भी खत्म हो गया है।एक किसान ने कहा कि “इसी जमीन से हमारे परिवार की रोजी-रोटी चलती थी। जमीन चली गई, लेकिन उचित मुआवजा नहीं मिला। अब हम लोग अपनी समस्या लेकर अधिकारियों के पास पहुंच रहे हैं, लेकिन हमारी गुहार सुनने वाला कोई नहीं है।”
किसानों का दावा- अभी तक नहीं हुआ निर्माण
प्रभावित किसानों का कहना है कि जमीन सीमा सुरक्षा बल को सौंपे जाने के बावजूद अब तक जमीन पर किसी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं किया गया है। किसानों ने प्रशासन से यह भी स्पष्ट करने की मांग की है कि जमीन का उपयोग कब और किस उद्देश्य से किया जाना है।किसानों का कहना है कि यदि जमीन का अधिग्रहण किया गया है तो उन्हें नियमानुसार और वर्तमान मूल्य के अनुरूप मुआवजा मिलना चाहिए।
डीएम से लगाई न्याय की गुहार
किसानों ने जिला पदाधिकारी को आवेदन देकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जमीन के मूल्य का उचित आकलन कराया जाए और सभी प्रभावित किसानों को न्यायसंगत मुआवजा उपलब्ध कराया जाए।
किसानों ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि मामले में संबंधित विभाग के अधिकारियों और जमीन मालिक किसानों के साथ बैठक कर समस्या का समाधान निकाला जाए।फिलहाल 37 एकड़ जमीन और 80 किसानों के मुआवजे का मामला जिला प्रशासन के समक्ष पहुंच गया है। अब किसानों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन मामले की जांच कर उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान करेगा।








