धर्मेन्द्र कु लाठ पूर्णिया
पूर्णिया जिले के कसबा स्थित ऐतिहासिक महावीर चौक के समीप कोसी नदी की धार पर दशहरा के अवसर पर भव्य रावण दहन कार्यक्रम धूमधाम और शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। वर्षों पुरानी इस परंपरा को देखने के लिए 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। विशाल जनसमूह के बीच पुलिस और स्थानीय प्रशासन की सतर्कता से कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। आयोजन में धार्मिक उत्साह के साथ आपसी सौहार्द और भाईचारे की झलक भी देखने को मिली।
SDPO-2 डॉ. गौरव कुमार ने संभाली सुरक्षा की कमान
विशाल भीड़ को देखते हुए सदर एसडीपीओ-2 डॉ. गौरव कुमार ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की कमान संभाली। पुलिस बल की तैनाती से लेकर कार्यक्रम स्थल की निगरानी तक प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। पूर्णिया के वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) डॉ. शौर्य सुमन भी कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने आयोजन की सफलता पर पुलिस पदाधिकारियों, जवानों और स्थानीय आयोजन समिति की सराहना की। SSP ने कसबा में दिखे कौमी एकता और आपसी सौहार्द की प्रशंसा करते हुए कहा कि पूर्णिया पुलिस की कोशिश है कि सभी धार्मिक और सामाजिक आयोजन इसी तरह शांतिपूर्ण एवं भाईचारे के माहौल में संपन्न हों। उन्होंने SDPO-2 डॉ. गौरव कुमार के नेतृत्व और सुरक्षा व्यवस्था की भी सराहना की।
NDRF, मेडिकल टीम और अग्निशमन दल रहे मुस्तैद
कोसी नदी के किनारे आयोजित कार्यक्रम को देखते हुए किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए NDRF की टीम, स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीम और अग्निशमन दल को अलर्ट रखा गया था। कसबा प्रशासन और पुलिस के साथ कसबा दुर्गा स्थान समिति के सदस्यों ने भी व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग किया।
कार्यक्रम में एसडीएम विग्नेश टीए, डीसीएलआर प्रीति कुमारी, कसबा बीडीओ मधु कुमारी, सीओ निशांत कुमार, कार्यपालक पदाधिकारी दीपक कुमार, कसबा थानाध्यक्ष ज्ञान रंजन, जलालगढ़ थानाध्यक्ष सहित पुलिस बल के जवान मौजूद रहे। वहीं मुख्य पार्षद कुमारी छाया, समाजसेवी गोपाल यादव और जदयू अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष हसमत राही सहित कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग भी उपस्थित थे।
रावण दहन के बाद कोसी तट पर हुई भव्य आरती
विशाल रावण के पुतले के दहन के बाद कोसी नदी के तट पर भव्य आरती का आयोजन किया गया। इसके बाद मां दुर्गा की प्रतिमा का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विसर्जन किया गया। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में उत्साह और धार्मिक आस्था का माहौल बना रहा।
कसबा का यह ऐतिहासिक आयोजन एक बार फिर आस्था, परंपरा और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक बना। पुलिस-प्रशासन की सतर्कता और स्थानीय समिति के सहयोग से विशाल जनसमूह के बीच कार्यक्रम का शांतिपूर्ण समापन हुआ।







