धर्मेंद्र कुमार लाठ पूर्णिया ब्यूरो
पूर्णिया में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर पुलिस ने जागरूकता अभियान चलाया। काझा कोठी क्षेत्र में आयोजित महिला सशक्तिकरण एवं सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम में विशेष अपराध अनुसंधान शाखा की डीएसपी शिवानी श्रेष्ठा ने महिलाओं और बच्चों से सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्हें अपने अधिकारों, कानूनी प्रावधानों और किसी भी आपात स्थिति में पुलिस से मदद लेने के तरीकों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों को सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ उनमें किसी भी तरह के शोषण, उत्पीड़न और साइबर अपराध के खिलाफ आवाज उठाने का आत्मविश्वास पैदा करना रहा। डीएसपी ने बच्चों को समझाया कि किसी भी परेशानी को छिपाने के बजाय अपने अभिभावकों और संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी देना जरूरी है।
आपात स्थिति में इन हेल्पलाइन नंबरों से लें मदद
कार्यक्रम के दौरान डीएसपी शिवानी श्रेष्ठा ने बच्चों को महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आपातकालीन स्थिति में पुलिस सहायता के लिए 112, बच्चों से संबंधित सहायता और संरक्षण के लिए 1098, जबकि ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए 1930 नंबर पर संपर्क किया जा सकता है।
उन्होंने बच्चों को समझाया कि यदि उनके साथ कहीं कोई अप्रिय घटना होती है या उन्हें किसी प्रकार का खतरा महसूस होता है, तो बिना डर के मदद मांगनी चाहिए। समय पर सूचना देने से संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई करने और पीड़ित को सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
POCSO एक्ट के बारे में दी गई जानकारी
महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से कार्यक्रम में पॉक्सो (POCSO) एक्ट के महत्वपूर्ण प्रावधानों पर भी चर्चा की गई। डीएसपी ने बच्चों और उनके अभिभावकों को बाल यौन शोषण से संबंधित कानूनी सुरक्षा और शिकायत करने की प्रक्रिया के बारे में जागरूक किया।
उन्होंने बच्चों को बताया कि उनके साथ किसी भी तरह का अनुचित व्यवहार, शोषण या उत्पीड़न होने पर चुप रहने की जरूरत नहीं है। ऐसी स्थिति में वे अपने माता-पिता, विश्वसनीय शिक्षक, नजदीकी पुलिस थाना या संबंधित हेल्पलाइन की मदद ले सकते हैं।
डीएसपी ने साइबर अपराध को लेकर भी सतर्क रहने की जरूरत बताई। उन्होंने बच्चों को ऑनलाइन गतिविधियों के दौरान सावधानी बरतने और किसी भी संदिग्ध घटना की जानकारी जिम्मेदार व्यक्ति या पुलिस को देने के लिए प्रेरित किया।
महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित बनाना उद्देश्य
कार्यक्रम में महिलाओं और बच्चों के अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा और कानून के प्रति जागरूकता को प्रमुखता दी गई। पुलिस अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवार और समाज की भी सामूहिक जिम्मेदारी है।
ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों को सही समय पर मदद मांगने, अपने अधिकारों को समझने और असुरक्षित परिस्थितियों की पहचान करने में सहायता मिल सकती है।
काझा कोठी में आयोजित इस कार्यक्रम के जरिए संदेश दिया गया कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है। किसी भी तरह के शोषण या उत्पीड़न के खिलाफ चुप रहने के बजाय उचित माध्यम से शिकायत करना और समय पर सहायता लेना चाहिए।








