पूर्णिया। बनमनखी थाना क्षेत्र के मोहनिया चकला वार्ड नंबर 10 निवासी अधिवक्ता सुभाष कुमार जमीन विवाद से परेशान होकर न्याय की गुहार लगाने पूर्णिया के एसएसपी के समक्ष पहुंचे। अधिवक्ता ने अपने चचेरे भाई सुरेंद्र यादव और चचेरे भतीजे सुवीर कुमार पर जमीन में लगे बांस काटने, गाली-गलौज करने तथा जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाते हुए एसएसपी को आवेदन सौंपा है। अधिवक्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है।
अधिवक्ता सुभाष कुमार ने बताया कि विवाद केवाला के माध्यम से खरीदी गई जमीन को लेकर है। उनके अनुसार कुल करीब 29 डिसमिल जमीन में से 14.5 डिसमिल जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। उनका दावा है कि विवादित जमीन उनकी पत्नी के नाम से केवाला के माध्यम से खरीदी गई है। इसी जमीन पर उनके द्वारा लगाए गए बांस को लेकर भी विवाद उत्पन्न हुआ है।
सुभाष कुमार का आरोप है कि उनके दियाद और चचेरे रिश्तेदार सुवीर कुमार तथा चचेरे भाई सुरेंद्र यादव द्वारा उनकी जमीन पर लगे बांस को काटा जाने लगा। जब उनकी पत्नी ने इसका विरोध किया और बांस काटने से रोकने का प्रयास किया तो कथित रूप से उनके साथ गाली-गलौज की गई तथा जान से मारने की धमकी दी गई। घटना के बाद परिवार के लोगों में भय का माहौल बन गया।
थाने से संतोषजनक कार्रवाई नहीं होने का आरोप
अधिवक्ता ने बताया कि घटना के बाद उन्होंने मामले की शिकायत लेकर बनमनखी थाना का रुख किया। उनका आरोप है कि थाना पहुंचने के बावजूद उन्हें मामले में संतोषजनक जवाब या कार्रवाई का भरोसा नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने मामले को लेकर वरीय पुलिस अधिकारी के समक्ष जाने का निर्णय लिया।
अधिवक्ता सुभाष कुमार ने पूर्णिया एसएसपी को दिए आवेदन में पूरे मामले की जांच कराने, जमीन से जुड़े विवाद की वास्तविक स्थिति की जांच करने तथा धमकी और बांस काटने के आरोपों पर उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि वे स्वयं अधिवक्ता हैं और कानून की प्रक्रिया में विश्वास रखते हैं। उनका कहना है कि वह किसी विवाद को बढ़ाना नहीं चाहते, बल्कि कानून के माध्यम से मामले का समाधान चाहते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें पूर्णिया एसएसपी पर पूरा विश्वास है और उम्मीद है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर उन्हें न्याय दिलाया जाएगा।
जमीन के कागजात और घटनाक्रम की जांच जरूरी
मामला जमीन के स्वामित्व और कब्जे से जुड़े विवाद के साथ-साथ बांस काटने, कथित गाली-गलौज और धमकी के आरोपों से जुड़ा है। ऐसे में जमीन के केवाला, वास्तविक कब्जे तथा दोनों पक्षों के दावों की जांच के साथ घटना से संबंधित तथ्यों की पुलिस जांच महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल अधिवक्ता की ओर से लगाए गए आरोपों पर पुलिस की जांच और दूसरे पक्ष का बयान सामने आना बाकी है। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पूरे विवाद की वास्तविक स्थिति क्या है और आरोपों में कितनी सच्चाई है।







