धर्मेन्द्र कुमार लाठ, पूर्णिया ब्यूरो
कसबा (पूर्णिया)। पूर्णिया जिले के कसबा प्रखंड में स्थित राणी सती मंदिर आज सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों और पड़ोसी नेपाल तक फैली श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। दादी मां के इस दरबार में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। भक्तों की मान्यता है कि सच्चे मन से दादी मां के दरबार में की गई प्रार्थना और मनोकामना पूरी होती है।
कसबा का राणी सती मंदिर अपनी धार्मिक परंपराओं और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के कारण विशेष पहचान रखता है। मंदिर में प्रतिदिन सुबह और शाम आरती होती है। आरती के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब जाता है। स्थानीय श्रद्धालुओं के अलावा बिहार के विभिन्न जिलों, दूसरे राज्यों और नेपाल से भी श्रद्धालुओं के पहुंचने की बात मंदिर प्रबंधन की ओर से बताई जाती है।राणी सती मंदिर में वर्षभर धार्मिक गतिविधियां चलती रहती हैं, लेकिन भादवा महोत्सव और मार्गशीर्ष महोत्सव विशेष महत्व रखते हैं। इन अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु कसबा पहुंचते हैं और मंगल पाठ, पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन, आरती सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होते हैं।
मंदिर की स्थापना से जुड़ी मान्यता भी काफी रोचक है। मान्यता के अनुसार, राणी सती दादी मां लगभग 700 वर्ष पूर्व हरियाणा के मिमानी देवसर गांव में सती हुई थीं। इसके बाद उनकी आस्था और महिमा विभिन्न क्षेत्रों में फैलती गई।कसबा में मंदिर की स्थापना की कहानी एक स्वप्न से जुड़ी बताई जाती है। वर्ष 2023 विक्रम संवत की भाद्रपद अमावस्या को बराकर निवासी झूनझूनवाला को स्वप्न में दादी मां द्वारा पूर्णिया में मंदिर स्थापित कर उनकी महिमा का प्रचार-प्रसार करने का आदेश मिलने की मान्यता है। इसके बाद कटिहार में उनकी मुलाकात कसबा के सेठ ताराचंद्र लाठ के बड़े पुत्र नंदलाल लाठ से हुई।
नंदलाल लाठ ने उन्हें कसबा स्थित अपने घर पर दादी मां की पूजा के लिए आमंत्रित किया। इसके बाद सेठ ताराचंद्र लाठ के घर पर दादी मां की प्रथम पूजा हुई। इसी के बाद कसबा में मंदिर निर्माण की दिशा में प्रयास शुरू हुए।मंदिर निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ी और 1966 में मंदिर का शिलान्यास किया गया। इसके बाद 1968 में भव्य समारोह के बीच प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई। मंदिर समिति के प्रथम अध्यक्ष के रूप में सेठ ताराचंद्र लाठ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
समय के साथ मंदिर कसबा की पहचान का अभिन्न हिस्सा बन गया। मंदिर की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कसबा का प्रमुख चौक आज राणी सती चौक के नाम से जाना जाता है।मंदिर कमेटी के सचिव सुनील कुमार लाठ ने बताया कि श्री राणी सती मंदिर में भादवा महोत्सव-2026 का आयोजन 10 एवं 11 सितंबर को श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ किया जाएगा। महोत्सव को लेकर मंदिर परिसर में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं और श्रद्धालुओं से परिवार एवं इष्ट-मित्रों के साथ कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की गई है।

10 सितंबर, गुरुवार को दोपहर 12:30 बजे से शाम 7:30 बजे तक मंगल पाठ एवं महाआरती का आयोजन होगा। इस दौरान दादी का भव्य श्रृंगार, ज्योत दर्शन, भजन-कीर्तन सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम होंगे। श्रद्धालुओं के लिए छप्पन भोग एवं महाप्रसाद की व्यवस्था भी रहेगी।5वहीं 11 सितंबर, शुक्रवार को प्रातःकाल जात-जडुला, पूजा-अर्चना एवं प्रसाद वितरण का आयोजन किया जाएगा। दो दिवसीय महोत्सव को लेकर दादी भक्तों में उत्साह है और आयोजकों को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
मंदिर कमेटी के सचिव सुनील कुमार लाठ ने बताया कि मंदिर में वर्षों से बंद रसोई भोजनालय को फिर से चालू कर दिया गया है। मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भोजन की व्यवस्था शुरू होने से भक्तों को सुविधा मिलने की उम्मीद है। मंदिर प्रबंधन की ओर से श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में तैयारी की जा रही है।वहीं मंदिर के ट्रस्टी सुशील कुमार लाठ ने मंदिर की धार्मिक पहचान का उल्लेख करते हुए बताया कि उनके अनुसार राजस्थान के झुंझुनू स्थित राणी सती मंदिर भारत में पहला प्रमुख मंदिर है और कसबा का राणी सती मंदिर दूसरे स्थान पर माना जाता है। उन्होंने कहा कि कसबा स्थित मंदिर की अपनी विशिष्ट धार्मिक पहचान है और यहां दूर-दराज से श्रद्धालु दादी मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।भादवा महोत्सव के दौरान मंदिर में होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। मंदिर प्रबंधन श्रद्धालुओं के लिए पूजा-अर्चना, महाप्रसाद और अन्य व्यवस्थाओं को सुचारू रखने की तैयारी में जुटा है। 10 और 11 सितंबर को कसबा का राणी सती मंदिर भक्ति और आस्था के रंग में सराबोर होने की उम्मीद है।








