पूर्णिया इफको (इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड) के राष्ट्रीय चेयरमैन एवं गुजरात के पूर्व मंत्री दिलीप संघाणी गुरुवार को पूर्णिया पहुंचे। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बिहार के मखाना उद्योग, किसानों की आय, खाद की उपलब्धता और सीमांचल के विकास से जुड़े कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी।
प्रेस वार्ता में दिलीप संघाणी ने कहा कि बिहार देश में मखाना उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र है। यहां के हजारों किसान प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से मखाना की खेती और उसके व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने मखाना की बढ़ती उपयोगिता और किसानों के हितों को देखते हुए मखाना बोर्ड का गठन किया है, जिससे किसानों, व्यापारियों और प्रसंस्करण उद्योग को एक नई दिशा मिलेगी।उन्होंने कहा कि आज मखाना केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक विश्वस्तरीय (Global) उत्पाद बन चुका है। अमेरिका, यूरोप, खाड़ी देशों सहित कई देशों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। विशेष रूप से पूर्णिया और सीमांचल क्षेत्र का मखाना अपनी गुणवत्ता, स्वाद और पोषण मूल्य के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में अलग पहचान बना चुका है।
दिलीप संघाणी ने कहा कि केंद्र और संबंधित विभागों के स्तर पर मखाना के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर भी चर्चा चल रही है। यदि इस दिशा में सकारात्मक निर्णय होता है तो इससे लाखों मखाना उत्पादक किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और उनकी आमदनी में बढ़ोतरी होगी।
पत्रकारों ने जब सीमांचल में अलग से मखाना बोर्ड या क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित करने का सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण सुझाव है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस संबंध में वह केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से चर्चा करेंगे और सीमांचल के किसानों की मांग को उनके समक्ष रखेंगे।
खाद की उपलब्धता और किसानों को हो रही परेशानी पर इफको चेयरमैन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर उर्वरक उत्पादन और आपूर्ति पर पड़ा है। ईरान-अमेरिका के बीच तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित हुई, जिससे देश में कुछ समय के लिए खाद की कमी की स्थिति बनी। हालांकि उन्होंने भरोसा दिलाया कि इफको लगातार उत्पादन क्षमता बढ़ाने और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने में जुटा है।
उन्होंने कहा कि इफको का उद्देश्य है कि देश के किसी भी किसान को खाद की कमी का सामना न करना पड़े। इसके लिए उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ राज्यों में समय पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने किसानों से आधुनिक खेती अपनाने, सहकारिता से जुड़ने और वैज्ञानिक तरीके से खेती करने की अपील की। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में बिहार, विशेषकर पूर्णिया और सीमांचल का मखाना उद्योग देश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।







