धर्मेन्द्र कु लाठ पूर्णिया ब्यूरो
पूर्णिया। अंतर्राष्ट्रीय बुजुर्ग दिवस के अवसर पर पूर्णिया स्थित वृद्ध आश्रम में बुजुर्गों और राजकीय पॉलिटेक्निक के छात्र-छात्राओं के बीच संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को बुजुर्गों के जीवन अनुभवों से जोड़ना और समाज में बुजुर्गों के प्रति सम्मान, संवेदनशीलता तथा जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना था।
कार्यक्रम में पूर्णिया के जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार, DLSA के सेक्रेटरी सुनील कुमार समेत कई लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों और छात्र-छात्राओं ने वृद्ध आश्रम में रह रहे बुजुर्गों से मुलाकात की और उनके अनुभवों एवं जीवन से जुड़ी बातों को सुना।
डीएम ने कहा- बुजुर्ग बरगद के पेड़ के समान
इस अवसर पर जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार ने कहा कि आज के समय में बुजुर्गों और बच्चों के बीच संवाद कम होना तथा एकल परिवार की बढ़ती प्रवृत्ति बुजुर्गों के लिए एक बड़ी चुनौती बन रही है। परिवार में जब अलग-अलग पीढ़ियों के बीच संवाद कम होता है तो बुजुर्गों में अकेलेपन की भावना बढ़ सकती है।
डीएम ने बुजुर्गों की तुलना बरगद के पेड़ से करते हुए कहा कि जिस तरह बरगद का विशाल पेड़ अपनी छाया में लोगों को राहत देता है, उसी तरह बुजुर्ग अपने जीवन के अनुभव, ज्ञान और संस्कारों से परिवार और समाज को दिशा देते हैं।
उन्होंने कहा कि बुजुर्गों ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा परिवार और समाज के निर्माण में लगाया है। उनके अनुभवों को केवल उम्र के चश्मे से नहीं देखना चाहिए, बल्कि उन्हें समझना और उनसे सीखना चाहिए। नई पीढ़ी को अपने बुजुर्गों के साथ समय बिताना चाहिए और उनकी बातों को सुनना चाहिए।
छात्रा ज्योत्सना ने बुजुर्गों को बताया परिवार की जड़
कार्यक्रम के दौरान राजकीय पॉलिटेक्निक की छात्रा ज्योत्सना ने भी बुजुर्गों के महत्व पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि बुजुर्ग हमारे जड़ के समान हैं। जिस तरह किसी पेड़ के लिए उसकी जड़ सबसे महत्वपूर्ण होती है, उसी तरह परिवार के लिए बुजुर्ग महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने कहा कि अगर हम अपनी जड़ को ही खोद डालेंगे तो पूरा पेड़ सूख जाएगा। इसलिए नई पीढ़ी को बुजुर्गों के साथ रिश्ते मजबूत रखने चाहिए और उनके अनुभवों से सीखना चाहिए।
बुजुर्ग ने सुनाई अपनी पीड़ा
संवाद कार्यक्रम के दौरान वृद्ध आश्रम में रह रहे एक बुजुर्ग ने अपनी जिंदगी की पीड़ा भी साझा की। उन्होंने बताया कि उन्होंने मेहनत कर अपने बच्चों को पढ़ाया-लिखाया और उन्हें बड़ा अधिकारी बनाया। लेकिन जीवन के इस पड़ाव पर वही बच्चे उन्हें घर से निकाल चुके हैं। मजबूर होकर उन्हें वृद्ध आश्रम में शरण लेनी पड़ी।
बुजुर्ग की बात सुनकर कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच भावुकता का माहौल बन गया। यह घटना इस बात की ओर भी इशारा करती है कि बुजुर्गों के लिए केवल आर्थिक सुरक्षा ही नहीं, बल्कि परिवार का साथ, सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव भी बेहद जरूरी है।
नई पीढ़ी और बुजुर्गों के बीच संवाद पर जोर
कार्यक्रम में बुजुर्गों और छात्र-छात्राओं के बीच संवाद कराया गया। छात्रों ने बुजुर्गों के जीवन अनुभवों को जाना और उनके संघर्षों के बारे में जानकारी ली। वहीं बुजुर्गों ने भी नई पीढ़ी से बातचीत कर अपने अनुभव साझा किए।
अंतर्राष्ट्रीय बुजुर्ग दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश देता नजर आया कि बुजुर्गों को परिवार और समाज से अलग नहीं, बल्कि उसका महत्वपूर्ण हिस्सा समझने की जरूरत है। डीएम अंशुल कुमार का संदेश भी यही रहा कि बुजुर्ग परिवार की ताकत और अनुभव की धरोहर हैं, इसलिए उनका सम्मान और उनके साथ संवाद हर पीढ़ी की जिम्मेदारी है।







