धर्मेन्द्र कु लाठ पूर्णिया ब्यूरो
पूर्णियां। बिहार में जमीन से जुड़े कार्यों को ऑनलाइन किए जाने के साथ अब इसका विरोध भी शुरू हो गया है। पूर्णियां में प्राइवेट अमीन का काम करने वाले अमीनों ने सिग्नेचर और जमीन मापी से जुड़े नए प्रावधानों को लेकर बैठक की। बैठक में अमीनों ने सरकार की नई व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इससे वर्षों से इस पेशे से जुड़े लोगों के रोजगार पर असर पड़ सकता है।बैठक में मौजूद प्राइवेट अमीनों का कहना था कि वे पिछले करीब 35 वर्षों से जमीन मापी और अमानत से जुड़े कार्य करते आ रहे हैं। उनका दावा है कि सरकारी अमीनों को भी नक्शा तैयार करने से लेकर जमीन की मापी जैसे कार्यों में वे लंबे समय से सहयोग करते रहे हैं।
सरकार पर रोजगार छीनने का आरोप
प्राइवेट अमीन आलोक आनंद ने कहा कि सरकार की नई व्यवस्था से वर्षों से इस काम से जुड़े प्राइवेट अमीनों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्राइवेट अमीनों के पास जमीन मापी का वर्षों का व्यावहारिक अनुभव है।आलोक आनंद ने कहा कि सरकारी अमीनों को सरकारी कार्यों तक ही सीमित रखा जाना चाहिए और आम जनता के जमीन मापी संबंधी कार्यों में प्राइवेट अमीनों की भूमिका को समाप्त नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वर्षों से प्राइवेट अमीन जनता को जमीन की मापी, नक्शा और अन्य अमानत संबंधी कार्यों में सहयोग करते आ रहे हैं।
राज्यस्तरीय आंदोलन की चेतावनी
बैठक में मौजूद मुरली सिंह ने कहा कि नई व्यवस्था को लेकर सरकार के समक्ष पहले अपनी मांगें और समस्याएं रखी जाएंगी। उन्होंने कहा कि यदि इस प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न होती है तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।उन्होंने बताया कि प्राइवेट अमीनों की ओर से पहले ज्ञापन सौंपकर सरकार और संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी मांग रखी जाएगी। यदि बातचीत और ज्ञापन के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को जिला स्तर से आगे बढ़ाकर राज्यस्तर पर ले जाया जाएगा।बैठक में प्राइवेट अमीनों ने सरकार से मांग की कि नई ऑनलाइन जमीन व्यवस्था लागू करते समय वर्षों से इस पेशे से जुड़े अमीनों के रोजगार और अनुभव को ध्यान में रखा जाए तथा उनके हितों की रक्षा के लिए उचित व्यवस्था की जाए।








