धर्मेन्द्र कुमार लाठ पूर्णिया
पूर्णिया। पूर्णिया जिले में मवेशियों के कथित अवैध परिवहन के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लगातार चर्चा में है। सदर-2 अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी डॉ. गौरव कुमार के नेतृत्व में केनगर और कसबा थाना क्षेत्रों में हुई कार्रवाइयों में कुल 33 मवेशियों की बरामदगी की जानकारी सामने आई है। केनगर में 26 मवेशियों के साथ पांच वाहनों की जब्ती और दो आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी है, जबकि कसबा में सात मवेशियों से लदा एक पिकअप जब्त कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इन मामलों में पुलिस की कार्रवाई के साथ अब मवेशियों के स्रोत, उनके गंतव्य, परिवहन के दस्तावेज और आरोपियों की भूमिका की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
कसबा थाना क्षेत्र में हुई कार्रवाई के दौरान सात मवेशियों से लदे पिकअप को जब्त किया गया। इस मामले में दो आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है। पुलिस मवेशियों को कहां से लाया गया था, उन्हें कहां ले जाया जा रहा था और परिवहन से जुड़े आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध थे या नहीं, जैसे बिंदुओं की पड़ताल कर रही है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
केनगर से कसबा तक कार्रवाई, डॉ. गौरव कुमार के नेतृत्व पर नजर
केनगर में 26 मवेशियों की बरामदगी और पांच वाहनों की जब्ती के बाद कसबा में सात मवेशियों से लदे पिकअप की बरामदगी ने जिले में मवेशियों के परिवहन से जुड़े मामलों को फिर सुर्खियों में ला दिया है। दोनों कार्रवाइयों में कुल 33 मवेशियों की बरामदगी, छह वाहनों की जब्ती और पांच आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। इन मामलों को लेकर अब पुलिस जांच के अगले चरण पर निगाहें टिकी हैं।
गौरतलब है कि 3 अक्टूबर को भी कसबा थाना क्षेत्र में एसडीपीओ सदर-2 डॉ. गौरव कुमार के नेतृत्व में बड़ी कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद कसबा में सात मवेशियों से लदे पिकअप की जब्ती और दो आरोपियों की गिरफ्तारी का मामला सामने आया है। हालांकि, 3 अक्टूबर की कार्रवाई और हालिया बरामदगी के बीच कोई सीधा संबंध है या नहीं, इसकी पुष्टि जांच के तथ्यों के आधार पर ही हो सकेगी।
पशु क्रूरता के पहलू की जांच भी अहम
मवेशियों के परिवहन के दौरान पशुओं की सुरक्षा, उनकी शारीरिक स्थिति, वाहन में उपलब्ध जगह और निर्धारित नियमों के पालन की जांच भी महत्वपूर्ण है। यदि पशुओं के साथ अमानवीय व्यवहार या परिवहन संबंधी नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल, पशु क्रूरता से जुड़े किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए जांच और साक्ष्यों का सामने आना जरूरी है।
पुलिस के लिए यह पता लगाना भी महत्वपूर्ण होगा कि बरामद मवेशियों का स्वामित्व किसके पास था, उन्हें किस उद्देश्य से ले जाया जा रहा था और परिवहन में शामिल लोगों की भूमिका क्या थी। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति या संगठित गिरोह की संलिप्तता के ठोस साक्ष्य मिलते हैं, तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
सीमांचल से पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश तक परिवहन की आशंका, जांच से ही होगा खुलासा
सीमांचल की भौगोलिक स्थिति के कारण बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच आवागमन होता है। इसी संदर्भ में सूत्रों के हवाले से मवेशियों को बिहार से पश्चिम बंगाल के रास्ते बांग्लादेश तक पहुंचाए जाने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, केनगर और कसबा में हुई बरामदगी को किसी अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क से जोड़ने के लिए ठोस साक्ष्य और आधिकारिक जांच जरूरी है। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि बरामद मवेशियों को बांग्लादेश ले जाया जा रहा था।
अब जांच के निष्कर्षों पर टिकी निगाहें
एसडीपीओ-2 डॉ. गौरव कुमार के नेतृत्व में हुई इन कार्रवाइयों के बाद पुलिस के सामने मवेशियों के स्रोत, गंतव्य, परिवहन के उद्देश्य और आरोपियों की भूमिका से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट करने की चुनौती है। साथ ही, दोनों थाना क्षेत्रों में हुई कार्रवाइयों के बीच किसी संबंध की संभावना भी जांच के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल, केनगर और कसबा में सामने आई बरामदगी तथा जब्ती की कार्रवाई ने जिले में मवेशियों के कथित अवैध परिवहन से जुड़े मामलों को महत्वपूर्ण बना दिया है। आगे की जांच में सामने आने वाले साक्ष्य ही यह स्पष्ट करेंगे कि इन मामलों की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और कानून के तहत आगे किन लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जरूरत है।








