धर्मेंद कुमार लाठ
पूर्णिया। बच्चों का भविष्य नशे की गिरफ्त में न आए और किशोरावस्था में ही उनकी जिंदगी गलत आदतों की ओर न मुड़े, इसके लिए पुलिस और समाज की संयुक्त पहल बेहद जरूरी है। सदर-2 अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी डॉ. गौरव कुमार के नेतृत्व और कम्युनिटी पुलिसिंग की अवधारणा को केंद्र में रखते हुए बच्चों को नशे से बचाने, उन्हें जागरूक करने और सही दिशा दिखाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इस दिशा में पुलिस की भूमिका केवल अपराध पर नियंत्रण तक सीमित नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने और बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने में भी महत्वपूर्ण है।
नशा बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यवहार और भविष्य की संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है। कम उम्र में नशीले पदार्थों के संपर्क में आने से बच्चे गलत संगति का शिकार हो सकते हैं। ऐसे में समय रहते जागरूकता, उचित मार्गदर्शन और परिवार का सहयोग उन्हें नशे से दूर रखने में मददगार साबित हो सकता है।
डॉ. गौरव कुमार के संदर्भ में कम्युनिटी पुलिसिंग की अहम भूमिका
कम्युनिटी पुलिसिंग पुलिस और आम जनता के बीच विश्वास तथा सहयोग का मजबूत माध्यम है। इसके जरिए बच्चों, अभिभावकों, शिक्षकों और समाज के जिम्मेदार लोगों को एक मंच पर लाकर नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाई जा सकती है। स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम, बच्चों के साथ संवाद और सामुदायिक बैठकों के माध्यम से नशे के दुष्परिणामों की जानकारी पहुंचाना इस प्रयास का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।
बच्चों को केवल चेतावनी देना ही पर्याप्त नहीं है। उनकी समस्याओं को समझना, उनकी बात सुनना और उन्हें खेलकूद, शिक्षा तथा रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना भी जरूरी है। पुलिस और समाज के बीच बेहतर समन्वय से बच्चों को सही दिशा देने के अवसर बढ़ सकते हैं।
बच्चों पर नजर नहीं, उनके साथ संवाद जरूरी
बच्चों को नशे से बचाने में अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। बच्चों के व्यवहार में अचानक बदलाव, पढ़ाई से दूरी या गलत संगति जैसे संकेत दिखाई देने पर उन्हें डांटने के बजाय बातचीत के जरिए उनकी परेशानी समझनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की मदद लेना भी उपयोगी हो सकता है।
डॉ. गौरव कुमार के पद और कम्युनिटी पुलिसिंग की भूमिका को केंद्र में रखकर यह संदेश सामने आता है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए पुलिस, परिवार और विद्यालय के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। जागरूकता के साथ संवेदनशील व्यवहार अपनाकर बच्चों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।
नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ समाज भी आए आगे
नशे के खिलाफ लड़ाई में आम नागरिकों की भागीदारी भी अहम है। यदि कहीं नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री या बच्चों को नशे की ओर धकेलने वाली गतिविधियों की जानकारी मिलती है, तो पुलिस को इसकी सूचना देनी चाहिए। नशे की समस्या से जूझ रहे बच्चों को अपमानित करने के बजाय उन्हें उचित परामर्श और सहयोग उपलब्ध कराना आवश्यक है।
बच्चों को नशे से बचाना केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का सामूहिक कर्तव्य है। कम्युनिटी पुलिसिंग के जरिए जागरूकता, विश्वास और सहयोग को मजबूत करना सुरक्षित बचपन और बेहतर भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।








