अपराध पर जीरो टॉलरेंस, तस्करी पर शिकंजा और जनता से सीधा संवाद—SDPO डॉ. गौरव कुमार की खास पुलिसिंग

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पूर्णिया। पूर्णिया सदर-2 के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) डॉ. गौरव कुमार अपनी सक्रिय कार्यशैली, सख्त पुलिसिंग और संवेदनशील सोच को लेकर चर्चा में हैं। अपराध नियंत्रण से लेकर अवैध शराब और मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई, सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने से लेकर बच्चों की सुरक्षा और आम लोगों के साथ सीधे संवाद तक, उनकी पुलिसिंग में कई महत्वपूर्ण पहलू नजर आते हैं। इससे पहले वे पटना सिटी में पुलिस पदाधिकारी के रूप में तैनात थे, जिसके बाद उनका स्थानांतरण पूर्णिया किया गया।

 

 

पूर्णिया सदर-2 में जिम्मेदारी संभालने के बाद डॉ. गौरव कुमार ने अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया है। अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ अवैध शराब, मादक पदार्थों की तस्करी, चोरी और अन्य आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए पुलिस टीमों को सक्रिय रखा जाता है। उनके नेतृत्व में पुलिस कार्रवाई का फोकस केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं, बल्कि अपराध के पीछे काम करने वाले नेटवर्क और सप्लाई चेन तक पहुंचने पर भी रहता है।
एनएच-27 और सीमा क्षेत्रों की सुरक्षा को लेकर भी उनकी सक्रियता देखने को मिलती है। चेक पोस्ट पर पुलिस की तैनाती, नियमित वाहन जांच, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर और अवैध तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने के लिए लगातार निगरानी पर जोर दिया जाता है। सड़क सुरक्षा और दुर्घटना की स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य में पुलिस की भूमिका को भी मजबूत बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

 

डॉ. गौरव कुमार की पुलिसिंग का एक महत्वपूर्ण पक्ष बच्चों की सुरक्षा और जागरूकता भी है। बच्चों से जुड़े अपराधों को लेकर वे संवेदनशील नजर आते हैं। जागरूकता अभियानों के जरिए बच्चों और आम लोगों को साइबर अपराध, बाल अपराध, पॉक्सो कानून और आत्मरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया जाता है। उनका प्रयास है कि बच्चे अपराध का शिकार बनने से बचें और किसी भी परेशानी की स्थिति में पुलिस तक अपनी बात आसानी से पहुंचा सकें।

इसके साथ ही पुलिस और जनता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना भी उनकी कार्यशैली का अहम हिस्सा है। जनसंवाद के माध्यम से लोगों की समस्याएं सुनना, कानून की जानकारी देना और अपराध से बचाव के प्रति जागरूक करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। पुलिसिंग को केवल कार्रवाई तक सीमित रखने के बजाय जनता की भागीदारी और सहयोग को भी अपराध नियंत्रण का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
सख्त कार्रवाई, अपराधियों पर जीरो टॉलरेंस, तस्करी पर शिकंजा, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, बच्चों के प्रति संवेदनशीलता और जनता से सीधा संवाद—इन सभी पहलुओं को साथ लेकर डॉ. गौरव कुमार पूर्णिया सदर-2 में प्रभावी और जन-केंद्रित पुलिसिंग की दिशा में सक्रिय नजर आ रहे हैं।

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