रूपौली में 34 गांव बाढ़ की चपेट में, युद्धस्तर पर राहत-बचाव अभियान
20 नावें, 7 सामुदायिक रसोई और 13 स्वास्थ्य शिविर सक्रिय; अब तक 16,559 लोगों ने किया भोजन
रूपौली, पूर्णिया। गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर और कारी कोसी के बैकवाटर के कारण रूपौली अंचल के करीब 34 गांव बाढ़ एवं जलजमाव की चपेट में हैं। बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी अंशुल कुमार के निर्देश पर जिला प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिया है। वरीय अधिकारियों की टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति की निगरानी कर रही हैं और जरूरतमंद परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।
प्रशासन के अनुसार, जलमग्न क्षेत्रों में आवागमन और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए चार सरकारी और 16 अधिग्रहित समेत कुल 20 नावों का लगातार परिचालन किया जा रहा है। इन नावों के माध्यम से प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाने के साथ लोगों के आवागमन में भी सहायता की जा रही है।
बाढ़ प्रभावित लोगों को पका हुआ भोजन उपलब्ध कराने के लिए रूपौली अंचल में 7 सामुदायिक रसोई केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। प्रशासन के अनुसार, 12 सितंबर तक इन सामुदायिक रसोई केंद्रों में कुल 16,559 लोगों ने भोजन किया है।
घर-घर पहुंचकर बांटे गए एक हजार सूखा राशन पैकेट
बाढ़ के पानी से चारों ओर से घिरे परिवारों तक राहत पहुंचाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। अपर समाहर्ता आपदा प्रबंधन, सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी धमदाहा एवं अंचल अधिकारी रूपौली की टीम ने घर-घर पहुंचकर प्रभावित परिवारों के बीच एक हजार सूखा राशन पैकेट वितरित किए।
प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों की जरूरतों का लगातार आकलन किया जा रहा है, ताकि आवश्यकता के अनुसार राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा सके।
13 स्वास्थ्य शिविरों में 5,873 मरीजों का उपचार
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए 13 स्वास्थ्य शिविर सक्रिय किए गए हैं। दुर्गम एवं जलमग्न इलाकों में मरीजों तक स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने के लिए एक बोट एंबुलेंस भी तैनात की गई है।
अब तक स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से करीब 5,873 मरीजों का उपचार किया जा चुका है। जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए प्रशासन की ओर से विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत 7,958 हैलोजन टैबलेट वितरित की गई हैं, जबकि 590 किलोग्राम ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया गया है।
1,446 पशुओं का उपचार, 273.45 क्विंटल चारा वितरित
बाढ़ के दौरान पशुओं की सुरक्षा और चिकित्सा के लिए तीन विशेष पशु चिकित्सा शिविर लगाए गए हैं। इन शिविरों के माध्यम से अब तक 1,446 पशुओं का उपचार किया गया है।
बाढ़ प्रभावित पशुपालकों को राहत पहुंचाने के लिए 273.45 क्विंटल पशुचारा भी वितरित किया गया है। प्रशासन की ओर से पशुओं के उपचार और चारे की उपलब्धता पर भी निगरानी रखी जा रही है।
1,200 से अधिक पॉलीथीन शीट का वितरण
बाढ़ प्रभावित परिवारों को अस्थायी आश्रय उपलब्ध कराने के लिए 1,200 से अधिक पॉलीथीन शीट का वितरण किया गया है। वहीं पेयजल एवं स्वच्छता व्यवस्था को लेकर पीएचईडी की ओर से चापाकलों की मरम्मत कराई जा रही है।
प्रभावित क्षेत्रों में दो टैंकरों के माध्यम से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए 17 अस्थायी शौचालयों का निर्माण भी कराया गया है।
24 घंटे सक्रिय जिला आपातकालीन संचालन केंद्र
बाढ़ से जुड़ी किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सहायता और समन्वय के लिए जिला आपातकालीन संचालन केंद्र (DEOC) को 24 घंटे सक्रिय रखा गया है। जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे तेज बहाव वाले और जलमग्न क्षेत्रों में जाने से बचें तथा प्रशासन की ओर से जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।
किसी भी आपात स्थिति में नागरिक जिला नियंत्रण कक्ष से संपर्क कर सकते हैं।
हेल्पलाइन: 06454-242319 / 242317 / 242320
ईमेल: deoc-purnea.bih@nic.in
जिला प्रशासन की टीमें बाढ़ प्रभावित गांवों में लगातार कैंप कर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। राहत एवं बचाव अभियान के साथ-साथ भोजन, स्वास्थ्य, पेयजल, पशु चिकित्सा और स्वच्छता की सुविधाएं उपलब्ध कराने का कार्य जारी है।







