धर्मेंद्र कुमार लाठ, पूर्णिया ब्यूरो
कसबा (पूर्णिया)। रोजगार और बेहतर कमाई का सपना लेकर आंध्र प्रदेश गए कसबा प्रखंड के मजदूरों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार को कसबा थाना क्षेत्र के जियनगंज निवासी 18 वर्षीय श्रवण कुमार ऋषि की पटना पीएमसीएच में इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके साथ ही इस मामले में मृतकों की संख्या बढ़कर छह हो गई है। लगातार हो रही मौतों से पूरे इलाके में मातम और आक्रोश का माहौल है, जबकि कई अन्य मजदूर गंभीर रूप से बीमार हैं।परिजनों का आरोप है कि स्थानीय ठेकेदार रोजगार और अच्छी मजदूरी का झांसा देकर युवकों को आंध्र प्रदेश के अनंतपुर स्थित एक मिनरल्स फैक्ट्री में ले गए, जहां बिना मास्क और सुरक्षा उपकरणों के पत्थर पीसने, खनिज पाउडर तैयार करने और रसायनों के बीच खतरनाक परिस्थितियों में काम कराया गया। जहरीली धूल के लगातार संपर्क में रहने से मजदूरों के फेफड़े खराब हो गए और एक-एक कर उनकी मौत होती गई।
इससे पहले जियनगंज निवासी मसद आलम, राजिक समेत पांच मजदूरों की मौत हो चुकी थी। शनिवार को श्रवण कुमार ऋषि की मौत के बाद उनका शव एम्बुलेंस से गांव लाया गया। शव पहुंचते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और पूरे गांव में मातम छा गया।सूचना पर कसबा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की। पोस्टमार्टम के बाद शव गांव पहुंचने पर आक्रोशित ग्रामीणों ने इस मामले के मुख्य आरोपी बताए जा रहे स्थानीय ठेकेदार मो. जुनेद के घर के सामने शव रखकर विरोध-प्रदर्शन किया। लोगों ने दोषियों की गिरफ्तारी, मृतक परिवारों को सरकारी मुआवजा और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
स्थिति को देखते हुए कांग्रेस के पूर्व विधायक एवं पूर्व मंत्री मोहम्मद अफाक आलम तथा जिला परिषद सदस्य रवि रंजन मौके पर पहुंचे। दोनों ने परिजनों और ग्रामीणों को समझा-बुझाकर शांत कराया। इसके बाद श्रवण कुमार ऋषि का अंतिम संस्कार गांव के श्मशान घाट में किया गया।पूर्व विधायक मोहम्मद अफाक आलम ने गहरा दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि लगातार छह मजदूरों की मौत बेहद दुखद और चिंताजनक है। उन्होंने मृतक परिवारों को उचित सरकारी मुआवजा, बीमार मजदूरों का समुचित इलाज तथा दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि बिहार में रोजगार के अभाव के कारण गरीब मजदूर दूसरे राज्यों में जाने को मजबूर हैं और वहां शोषण व असुरक्षित परिस्थितियों में काम करने के कारण अपनी जान गंवा रहे हैं।गौरतलब है कि इस मामले में पहले से कसबा थाना में स्थानीय ठेकेदारों एवं फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज है। पुलिस जांच में जुटी है। बताया जा रहा है कि आंध्र प्रदेश प्रशासन ने संबंधित फैक्ट्री को भी बंद कर दिया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन छह मजदूरों की मौत का जिम्मेदार कौन है? क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी? क्या पीड़ित परिवारों को न्याय और सरकारी मुआवजा मिलेगा? या फिर रोजगार की तलाश में गरीब मजदूर यूं ही मौत के मुंह में जाते रहेंगे?







