राजकुमारी अमृत कौर का देश की आजादी में अहम योगदान, दांडी मार्च व भारत छोड़ो आंदोलन में अंग्रेजों ने दो बार जेल भेजा भारत की आजादी में महत्वपूर्ण योगदान रहा है: सुभाष कुमार उपाध्यक्ष कसबा नगर परिषद

राजकुमारी अमृत कौर का देश की आजादी में अहम योगदान, दांडी मार्च व भारत छोड़ो आंदोलन में अंग्रेजों ने दो बार जेल भेजा भारत की आजादी में महत्वपूर्ण योगदान रहा है: सुभाष कुमार उपाध्यक्ष कसबा नगर परिषद

धर्मेंद्र कुमार लाठ पूर्णिया

राजकुमारी अमृत कौर का देश की आजादी में अहम योगदान, दांडी मार्च व भारत छोड़ो आंदोलन में अंग्रेजों ने दो बार जेल भेजा राजकुमारी अमृत कौर आहलुवालिया का भारत की आजादी में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्हें भारत की पहली महिला स्वास्थ्य मंत्री के साथ साथ देश के प्रतिष्ठित एम्स अस्पताल की स्थापना में अतुलनीय योगदान के लिए भी जाना जाता है उक्त बाते पूर्णिया जिला के कसबा नगर परिषद उपाध्यक्ष सुभाष कुमार ने एक भेट वार्ता में कहीराजकुमारी अमृत कौर का देश की आजादी में अहम योगदान, दांडी मार्च व भारत छोड़ो आंदोलन में अंग्रेजों ने दो बार जेल भेजा  भारत की आजादी में महत्वपूर्ण योगदान रहा है: सुभाष कुमार उपाध्यक्ष कसबा नगर परिषद

आगे उन्हें बताया कि राजकुमारी अमृत कौर आहलुवालिया का भारत की आजादी में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने 16 वर्षों तक महात्मा गांधी के सचिव के रूप में भी काम किया। उन्हें भारत की पहली महिला स्वास्थ्य मंत्री के साथ साथ देश के प्रतिष्ठित एम्स अस्पताल की स्थापना में अतुलनीय योगदान के लिए भी जाना जाता है वही श्री कुमार ने बताया की राज घराने से होने के बाद भी उनका देश और लोगों के प्रति सेवाभाव का जज्बा हमेशा ही प्रेरणा दायक रहा। अमृत कौर का जन्म 2 फरवरी 1889 को कपूरथला के शाही परिवार में हुआ। उनकी स्कूली शिक्षा ब्रिटेन के डोरसेट में शेरबोर्न स्कूल में हुई। आगे की पढ़ाई उन्होंने लंदन और आक्सफर्ड से की और शिक्षा के नूर ने उनके जेहन को दुनिया को बेहतर तरीके से समझने और सही दिशा में आगे बढ़ने की समझ दी। राजा हरनाम सिंह बेटी राजकुमारी अमृत कौर अपने सात भाइयों में अकेली बहन थी। राजकुमारी अमृत कौर महात्मा गांधी से खासी प्रभावित थीं। 1919 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के संपर्क में आने राजकुमारी अमृत कौर देश की आजादी में जुट गई। यह सम्पर्क अंत तक बना रहा।आप को बताते चलते है की दाडी मार्च में भाग लेने पर हुई जैल
गांधी जी के नेतृत्व में 1930 को जब ‘दांडी मार्च’ की शुरुआत हुई, तब राजकुमारी अमृत कौर ने उनके साथ यात्रा की और जेल की सजा भी काटी। 1934 से वह गांधी जी के आश्रम में ही रहने लगीं और उन्हें ‘भारत छोड़ो अंदोलन’ के दौरान भी जेल हुई। अमृत कौर ‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस’ की प्रतिनिधि के तौर पर 1937 में पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत के बन्नू गई। ब्रिटिश सरकार को यह बात नागवार गुजरी और राजद्रोह का आरोप लगाकर उन्हें जेल में बंद कर दिया।
स्वतंत्र भारत की पहली महिला स्वास्थ्य मंत्री बनी कौर ने एम्स की स्थापना के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धन जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।राजकुमारी कौर एक अंतरराष्ट्रीय कद की महिला थी। वे विश्व स्वास्थ्य संगठन की पहली महिला अध्ययक्ष भी थी।
1955 में मलेरिया के खिलाफ चलाया था बड़ा अभियान
स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए उन्होंने 1955 में मलेरिया के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया था। टाइम पत्रिका ने कौर को 20 वीं सदी की 100 सबसे प्रभावशाली महिलाओं की सूची में शामिल किया था। वह पहली एशियाई महिला थीं, जिन्हें 1950 में वर्ल्ड हैल्थ असेम्बली का अध्यक्ष चुना गया।
1961 में रेने सा मेमोरियल अवार्ड से सम्मानित
राजकुमारी अमृत कौर का देश की आजादी में अहम योगदान, दांडी मार्च व भारत छोड़ो आंदोलन में अंग्रेजों ने दो बार जेल भेजा राजकुमारी अमृत कौर आहलुवालिया का भारत की आजादी में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्हें भारत की पहली महिला स्वास्थ्य मंत्री के साथ साथ देश के प्रतिष्ठित एम्स अस्पताल की स्थापना में अतुलनीय योगदान के लिए भी जाना जाता है उक्त बाते पूर्णिया जिला के कसबा नगर परिषद उपाध्यक्ष सुभाष कुमार ने एक भेट वार्ता में कही आगे उन्हें बताया कि राजकुमारी अमृत कौर आहलुवालिया का भारत की आजादी में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने 16 वर्षों तक महात्मा गांधी के सचिव के रूप में भी काम किया। उन्हें भारत की पहली महिला स्वास्थ्य मंत्री के साथ साथ देश के प्रतिष्ठित एम्स अस्पताल की स्थापना में अतुलनीय योगदान के लिए भी जाना जाता है वही श्री कुमार ने बताया की
राज घराने से होने के बाद भी उनका देश और लोगों के प्रति सेवाभाव का जज्बा हमेशा ही प्रेरणा दायक रहा। अमृत कौर का जन्म 2 फरवरी 1889 को कपूरथला के शाही परिवार में हुआ। उनकी स्कूली शिक्षा ब्रिटेन के डोरसेट में शेरबोर्न स्कूल में हुई। आगे की पढ़ाई उन्होंने लंदन और आक्सफर्ड से की और शिक्षा के नूर ने उनके जेहन को दुनिया को बेहतर तरीके से समझने और सही दिशा में आगे बढ़ने की समझ दी। राजा हरनाम सिंह बेटी राजकुमारी अमृत कौर अपने सात भाइयों में अकेली बहन थी। राजकुमारी अमृत कौर महात्मा गांधी से खासी प्रभावित थीं। 1919 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के संपर्क में आने राजकुमारी अमृत कौर देश की आजादी में जुट गई। यह सम्पर्क अंत तक बना रहा।आप को बताते चलते है की दाडी मार्च में भाग लेने पर हुई जैल गांधी जी के नेतृत्व में 1930 को जब ‘दांडी मार्च’ की शुरुआत हुई, तब राजकुमारी अमृत कौर ने उनके साथ यात्रा की और जेल की

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