पंडालों, मंदिरों में महाष्टमी पूजा को मां की खोइंचा भरने उमड़़े श्रद्धालु,सुहागिन महिलाओं में खोइंचा भरने की लगी रही होड़

पंडालों, मंदिरों में महाष्टमी पूजा को मां की खोइंचा भरने उमड़़े श्रद्धालु,सुहागिन महिलाओं में खोइंचा भरने की लगी रही होड़

अररिया संवाददाता
पंडालों, मंदिरों में महाष्टमी पूजा को मां की खोइंचा भरने उमड़़े श्रद्धालु,सुहागिन महिलाओं में खोइंचा भरने की लगी रही होड़।

दुर्गोत्सव पर अररिया का शहरी और ग्रामीण इलाका एक बड़े मेले में तब्दील हो गया है।सड़कों पर मेले जैसा नजारा दिख रहा। देवी दर्शन के साथ लोग परिवार के संग मेले का आनंद ले रहे हैं। चाट-पकोड़े,चाउमिन सहित पूजा पंडाल के बाहर लगे स्टॉल ओर बच्चे,महिलाएं और बूढ़े खाने का कुत्फ़ ले रहे हैं तो बच्चे फुटपाथी मेले में भांति-भांति के खिलौने लेने की जिद करते दिखे। सड़कों पर आस्था का जनसैलाब ऐसा कि देर रात तक शहर के विभिन्न इलाकों में जाम की स्थिति रही।

पंडालों, मंदिरों में महाष्टमी पूजा को मां की खोइंचा भरने उमड़़े श्रद्धालु,सुहागिन महिलाओं में खोइंचा भरने की लगी रही होड़
महाष्टमी के मौके पर मां दुर्गा की खोइंचा भराई की परंपरा है। लगभग पूरे दिन महिला श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी कतारें भगवती की खोइंचा भरने के लिए पूजा पंडालों में लगी रहीं। मां की खोइंचा में चावल, हल्दी, दूभि, पैसे, चुनरी, साड़ी, जीरा आदि अर्पित किया गया।पंडित सुरेश मिश्र के अनुसार जीरा का खास महत्व है। जीरा मतलब जीव होता है। मैके से ससुराल खोइंचा में जीव लेकर आना शुभ और भाग्यशाली माना जाता है। मां की खोइंचा भरने के लिए सभी पूजा पंडालों में देर शाम तक भारी भीड़ उमड़ती रही।सुहागिन महिलाओं में खोइंचा भरने की होड़ लगी रही।
महाष्टमी पर श्रद्धालुओं ने व्रत रखे। मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा अर्चना की । मान्यता है कि महाष्टमी पर व्रत रखने से पूरी नवरात्रि के व्रत के समान फल की प्राप्ति होती है।
महाष्टमी और महानवमी के मिलन समय पर दोपहर 1.55 बजे से 2.40 बजे के बीच मंदिरों,शक्तिस्थलों और पूजा पंडालों में संधि पूजा शुरू हुई। पंडितों की अगुआई में 108 फूल, 108 नैवेद्य, 108 सुपारी, 108 पान पत्ता,108 बेलपत्र और 108 दीप के साथ संधि पूजा की गयी।संधि पूजा से महाकाली,महालक्ष्मी और महासरस्वती तीनों देवी प्रसन्न होती हैं। इससे पूरे नवरात्र का फल श्रद्धालु को मिलता है। धन-धान्य,पुत्र की वृद्धि होती है और शत्रु भी मित्र बन जाता है।
दुर्गा पूजा में सप्तमी से महानवमी तक पुष्पांजलि की जाती है। महाष्टमी पूजा पर तमाम पूजा पंडालों खासकर बांग्ला पूजा पंडालों और बंगाली अखाड़ाओं में श्रद्धालुओं ने देवी को पुष्पांजलि अर्पित की। दिनभर में कम से कम तीन बार पुष्पांजलि की जाती है। आचार्यों ने बताया कि पुष्पांजलि से दुर्गापूजा की संपूर्णता होती है।

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