जाली नोटों के प्रचलन पर रोक लगाना बना हुआ है एक चुनौतीपूर्ण कार्य – जाली नोट का प्रचलन आम लोगों के लिए भी एक बड़ी समस्या

जाली नोटों के प्रचलन पर रोक लगाना बना हुआ है एक चुनौतीपूर्ण कार्य - जाली नोट का प्रचलन आम लोगों के लिए भी एक बड़ी समस्या

शरद कुमार/धर्मेंद्र कुमार लाठ/ पूर्णिया/
जाली नोटों के प्रचलन पर रोक लगाना बना हुआ है एक चुनौतीपूर्ण कार्य
– जाली नोट का प्रचलन आम लोगों के लिए भी एक बड़ी समस्या

 

पूर्णिया । देश में फैले जाली नोटों के प्रचलन पर प्रतिबंध लगाने के उद्देश्य भारत सरकार ने सन 2016 में एक बड़ा निर्णय लेते हुए नोटबंदी जैसा एक बड़ा कदम उठाया था। नोटबंदी के दौरान मोदी सरकार ने 500 रुपये मूल्य के और 1000 रुपये मूल्य के नोटों के प्रचलन पर कानूनी रूप से प्रतिबंध लगा दिया था। सरकार के द्वारा अचानक लिए गए फैसले से जहां जाली नोटों के कारोबारियों के बीच पूरी तरह हड़कंप मच गई थी वहीं आम लोगों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा थाजाली नोटों के प्रचलन पर रोक लगाना बना हुआ है एक चुनौतीपूर्ण कार्य - जाली नोट का प्रचलन आम लोगों के लिए भी एक बड़ी समस्या

नोटबंदी को लेकर केंद्र सरकार के द्वारा अचानक लिए गए फैसले पर विरोधी दलों के नेताओं ने मोदी सरकार का जमकर विरोध किया था बावजूद केंद्र सरकार अपने निर्णय पर पूरी तरह अडिग रहा। नोटबंदी के दौरान 1000 मूल्य के नोटों का प्रचलन पर केंद्र सरकार द्वारा स्थाई रूप से रोक लगा दी गयी किंतु 500 रुपये मूल के नोटों का स्वरूप को बदलकर प्रचलन में लाया गया। अब सवाल उठता है कि नोटबंदी के इतने सालों बाद क्या जाली नोटों का प्रचलन पूरी तरह समाप्त हो गया। अगर इसकी सच्चाई पर गौर किया जाए तो वर्तमान समय में जाली नोटों का प्रचलन और अधिक बढ़ गया है पूर्व की अपेक्षा। आज आम लोगों के लिए एक बड़ी समस्या बनी हुई है बाजार में बहुतायत संख्या में जाली नोटों का प्रचलन। जाली नोटों का बनावट कुछ ऐसी है कि आप लोगों को यह निर्णय लेने में काफी परेशानी होती है कौन सा नोट असली है और कौन जाली। जाली नोटों के प्रचलन पर भारतीय रिजर्व बैंक ने जो आंकड़े पेश किए हैं वह बेहद चिंताजनक है। भारतीय रिजर्व बैंक के द्वारा पेश की गई आंकड़ों को मानें तो वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान जाली नोटों का प्रचलन में काफी तेजी आई है। आंकड़ों के अनुसार सिर्फ 500 मूल्य के जाली नोटों में गत वर्ष की तुलना 102 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं 2000 रुपये मूल्य के जाली नोटों में 54.16 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

इसी तरह 200 रुपये मूल्य की एवं 10 और 20 रुपए मूल्य की जाली नोटों का प्रचलन भी काफी तेजी से फल-फूल रहा है। प्रचलन के तौर पर तेजी से फैलता जाली नोटों का कारोबार पर यथाशीघ्र कोई ठोस प्रतिबंध नहीं लगाया गया तो आने वाले दिनों में यह न सिर्फ सरकार के लिए एक चुनौतीपूर्ण कार्य होगा बल्कि आम लोगों के लिए भी एक बड़ी समस्या।
फोटो – 01, नोटों का बंडल, प्रतीकात्मक तस्वीर

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