
धर्मेंद्र कु लाठ पूर्णिया ब्यूरो
1998 से ही सामाजिक कार्य में सक्रिय हैं अंतर्राष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन के जिला अध्यक्ष बमबम साह
जनहित से जुड़े मुद्दे को लेकर मुखर और आंदोलनकारी प्रवृति है बमबम की पहचान
अपने बेहतरीन कार्यों से कई प्रतिष्ठित मंचों पर पा चुके हैं सम्मान पूर्णिया जिले के कसबा प्रखंड से आने वाले जीवनपर्यन्त संघर्षशील, जुझारू, क्रांतिकारी विचारों के धनी और अपना पूरा जीवन गरीब, असहाय और जरुरतमंदों की सेवा को समर्पित कर चुके अंतर्राष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन के जिला अध्यक्ष बमबम साह का पूरा जीवन व उनकी कार्यप्रणाली अन्य लोगों के लिए एक बहुत बड़ी मिसाल है।
उनकी समाजसेवा और जनहित से संबंधित विभिन्न मुद्दे को लेकर हमेशा गजब का जोश और तत्परता से समाज में उनकी एक अलग ही पहचान बन चुकी है और कसबा में उन्हें सम्मान के साथ कसबा का धरती पुत्र भी कहा जाता है। समाजसेवा के साथ-साथ अपने छात्र जीवन से ही जनहित से जुड़े मुद्दे को लेकर मुखर और आंदोलनकारी प्रवृति के बदौलत श्री साह समाज में अपनी एक अलग ही मुकाम हासिल कर चुके हैं।
मूल रूप से कसबा के रहने वाले बमबम साह अपनी इंटरमीडिएट की शिक्षा के समय से ही कसबा में जनहित से जुड़े मुद्दे को लेकर जन आंदोलन हेतु सक्रिय हो गये। तेज सवारी गाड़ी का ठहराव हो, रेल चक्का जाम आंदोलन हो या फिर शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन हो, इन गतिविधियों के माध्यम से हर छोटी बड़ी जन समस्या को लेकर जन आंदोलन का उनका सिलसिला अब भी जारी है। चाहे रेल हो, बिजली, पानी, सड़क हो, छात्र समस्या या मजदूरों की परेशानी, श्री साह हमेशा आगे बढ़कर आवाज उठाते रहे हैं।
समाजसेवा के क्षेत्र में बेहतर कार्य हेतु उन्हें कई सामाजिक संगठन से लेकर स्थानीय प्रशासन स्तर तक का सम्मान भी मिल चुका है। इतना ही नहीं बिहार की राजधानी पटना के विद्यापति भवन में एक विशेष कार्यक्रम में सूबे का नम्बर वन वैश्य जिला अध्यक्ष के रूप में वर्ष 2022 में तत्कालीन उप मुख्यमंत्री तारकेश्वर प्रसाद के हाथों भी सम्मान मिल चुका है। इसके अलावा भी और कई प्रतिष्ठित मंच पर बमबम साह को उचित सम्मान से नवाजा जा चुका है।
संघर्ष और कठोर परिश्रम से पाया है यह मुकाम –
साधारण परिवार में जन्मे बमबम साह की आर्थिक स्थिति उतनी अच्छी नहीं है लेकिन इसके बावजूद उन्होंने दमदार ऊर्जा के साथ समाजसेवा हेतु रात दिन एक करके लड़ते आ रहे हैं। लाचार कमजोर लोग बड़ी उम्मीद के साथ बमबम साह को अपने मुसीबत में किसी भी पहर अगर याद किया है तो परिस्थिति चाहे कोई भी हो, तपती धूप हो या बरसात या हो कड़ाके की ठंड रात हमेशा श्री साह को अपने साथ खड़ा पाते हैं।
उनका मानना है कि वर्तमान चुनावी पैसे के बल पर ही तय होता है, इसलिए तो नगर परिषद् के उप मुख्य पार्षद में मात्र कुछ वोट से उन्हें पराजित होना पड़ा, क्योंकि उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। लेकिन जनहित के लिए बुलंद हौसले और ऊर्जा के साथ हमेशा सक्रिय रहते हैं। वाकई में बमबम साह कसबा का एक मजबूत व अमूल्य कोहिनूर है जिसके जीवन का आधार कठोर परिश्रम रहा है। उन्होंने हमेशा सामाजिक उत्थान व समानता के लिए काम किया है जो उनकी समाजसेवा की एक बेहतरीन मिसाल है।
वर्ष 2000 में पूरे राज्य में सबसे कम उम्र के प्रत्याशी का बना चुके हैं रिकार्ड –
बिना किसी पूर्व विचार के बमबम साह के समाजसेवा के जुनून ने उन्हें चुनाव मैदान में उतरने हेतु विवश कर दिया। समाजसेवा में उनके प्रयासों को पहचान मिली। 1998 से ही सामाजिक कार्य में उनकी जो सक्रियता का सफर आरंभ हुआ था वह अब तक जारी है। श्री साह अपने समाजसेवा के बल पर वर्ष 2000 में पहली बार कसबा विधानसभा से पूरे बिहार का सबसे कम उम्र का प्रत्याशी बनकर चुनाव में उतरे और पूरे क्षेत्र में अपनी पहचान बनयी। वे अबतक कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ जुड़कर जनहित से जुड़े मुद्दे पर अपने आवाज को बुलंद करते रहे हैं। वर्तमान समय में बमबम साह अंतर्राष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन के जिला अध्यक्ष के रुप में अपनी सेवा दे रहे हैं और न केवल अपने कुशल नेतृत्व के बदौलत संगठन को मजबूती प्रदान कर रहे बल्कि गरीब एवं असहायों की मदद करने में खुद को कभी पीछे नहीं रख रहे हैं। विनम्रता उनके व्यक्तित्व का अभिन्न हिस्सा है।

