राजकीय पक्षी गौरेया के संरक्षण को लेकर मिसाल पेश कर रहे गुलाबबाग का शुभम – 20 मार्च को पूरी दुनिया में मनाया जाता है विश्व गौरैया दिवस – मानवीय आवश्यकता बढने से पक्षी हमसे हो रहे लगातार तटस्थ

राजकीय पक्षी गौरेया के संरक्षण को लेकर मिसाल पेश कर रहे गुलाबबाग का शुभम - 20 मार्च को पूरी दुनिया में मनाया जाता है विश्व गौरैया दिवस - मानवीय आवश्यकता बढने से पक्षी हमसे हो रहे लगातार तटस्थ

धर्मेंद्र कुमार लाठ पूर्णिया
राजकीय पक्षी गौरेया के संरक्षण को लेकर मिसाल पेश कर रहे गुलाबबाग का शुभम
– 20 मार्च को पूरी दुनिया में मनाया जाता है विश्व गौरैया दिवस
– मानवीय आवश्यकता बढने से पक्षी हमसे हो रहे लगातार तटस्थ
समूचे विश्व में 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस गौरैया के संरक्षण और संवर्धन को लेकर मनाया जाता है। गौरेया बिहार का राजकीय पक्षी है और राज्य की पहचान में उसकी एक महत्वपूर्ण भूमिका है वही पूर्णिया के एक युवक गौरैया प्रजाति की पक्षी को बचाने और उसे बढ़ाने के लिए पालनहार की भूमिका निभाकर दूसरे लोगों के लिए एक मिसाल पेश कर रहे हैं। गौरतलब है कि बिहार का राजकीय पक्षी गोरैया अब देखने को कम ही मिलता है लेकिन पिछले 4 साल से पूर्णिया के गुलाबबाग के रहने वाले शुभम ने अपने घरों में घोंसला बनाकर गौरैया का संरक्षण कर रहे हैं। शुभम बताते हैं कि वातावरण के अनुकूल रहने के चलते आसपास भी सैकड़ों की तादाद में गौरैया प्रवास कर रहे हैं। उनकी माने तो गोरैया प्रजाति शहरी इलाकों में दुर्लभ पक्षी बनकर रह गई है, जो पर्यावरण के लिए चिंता का विषय है। शुभम के मन में गौरैया के संरक्षण की भावना उस वक्त जगी जब पूरा देश कोरोना काल से गुजर रहा था वही शुभम गौरैया संरक्षण के लिए काम कर रहा था। शुभम के पिता शुभम के कार्यों की प्रशंसा करते हैं। उन्होंने बताया कि शुभम के प्रयास से चिड़ियों के चहचहाने की आवाज से नींद खुलती है और फिर दाना देने के बाद ही शांति मिलती है। गौरतलब है कि शास्त्रों में भी गौरैया का महत्व दर्शाया गया है जबकि घरों में लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है।राजकीय पक्षी गौरेया के संरक्षण को लेकर मिसाल पेश कर रहे गुलाबबाग का शुभम
- 20 मार्च को पूरी दुनिया में मनाया जाता है विश्व गौरैया दिवस 
- मानवीय आवश्यकता बढने से पक्षी हमसे हो रहे लगातार तटस्थ
गोरैया के संरक्षण को लेकर प्रयास नदारद –
बहरहाल बिहार का राजकीय पक्षी गौरैया जरूर है लेकिन इसके संवर्धन और विकास के लिए सरकार तरफ से कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। ऐसे में शुभम का प्रयास सराहनीय है जिसकी जितनी भी प्रशंसा की जाए कम होगी। शुभम बताते हैं कि आज हमारी आवश्यकता इतनी बढ गयी है कि हम प्रकृति और उसके संरक्षण के प्रति गैर जिम्मेदार होते जा रहे हैं। प्रकृति के प्रति हमारी गैर जिम्मेदाराना रवैया हमें विभिन्न तरह की प्राकृतिक विभीषिका के रुप में देखने को भी मिलती है लेकिन हम फिर भी सचेत नहीं हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि पक्षी हमारी प्रकृति का सबसे अहम हिस्सा है और हमारी विलासिता के कारण वे हमसे लगातार तटस्थ और विलुप्त होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें अपनी सौंदर्यरुपी प्रकृति को बचाना होगा और ऐसा हम प्रकृति के विभिन्न अवयव को संरक्षित करके ही कर सकते हैं। उन्होंने कहा हमें प्रकृति के संरक्षण हेतु कृतसंकल्पित होने की जरूरत है।

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