
शरद कुमार/धर्मेंद्र कुमार लाठ पूर्णिया
पूर्णिया जिला में मूर्ति विसर्जन के साथ मां दुर्गा का 10 दिवसीय पर्व दशहरा हर्षोल्लास पूर्ण वातावरण में हुआ संपन्न दुर्गापूजा को लेकर लोगों में दिखा गजब का उत्साह, आकर्षक मेला का हुआ आयोजन पूर्णिया जिला में मूर्ति विसर्जन के साथ पूर्णिया के शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में दुर्गापूजा महोत्सव का समापन हो गया।
आयोजकों ने कई जगहों में मूर्ति के विसर्जन संबंधी भव्य शोभायात्रा निकाली। शोभायात्रा में शामिल लोग ढोल की थाप पर नाचते रहे। जय माता की गूंज से पूरा क्षेत्र गूंजता रहा। इसके बाद नदी में मूर्ति का विसर्जन किया गया। नवरात्र में मधुबनी स्थित दुर्गा मंदिर में दुर्गा व देवी महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। नौ दिनों तक दुर्गा पंडालों में भक्तों ने मां के दर्शन किए। रोजाना सायंकाल भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ। अष्टमी पर्व को दुर्गा पूजा कमेटी ने भव्य दीपदान का आयोजन कराया। इसी दिन नगर पूजा कमेटी ने भंडारे का आयोजन कर भक्तों को चने, पूरी व हलवे का प्रसाद बांटा। नवमी को दुर्गा पूजा कमेटी की ओर से भंडारा कराया गया। हजारों हजार पाठा(बकरा) की बलि दी गयी।
विजयादशमी की सुबह दोनों पंडालों में पूजा अर्चना की गई। हवन यज्ञ किया गया। इसके बाद मां दुर्गा माता की मूर्तियों की शोभायात्रा निकाली गई। मां दुर्गा सहित अन्य मूर्तियों को विसर्जन किया गया। इस प्रकार मूर्ति विसर्जन के साथ महोत्सव का समापन हो गया है। इस दौरान भारी संख्या में लोगों की भीड़ रही। दुर्गा महोत्सव के तहत निकाली गई झांकी में नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा। कलाकारों ने एक से बढ़कर एक करतब दिखाए। जहां- जहां दल जा रहा था लोग टकटकी लगाए उनके नृत्य को देख रहे थे। गौरतलब है कि मधुबनी दुर्गा मंदिर को शहर के लोग आस्था का केन्द्र मानते हैं। इस मंदिर का इतिहास सौ वर्ष से भी पुराना है। मधुबनी में मां दुर्गा मंदिर वर्ष 1917 में स्थापित हुई थी। तीन वर्ष पूर्व वर्ष 2017 में मंदिर के 100 वर्ष पूरा होने पर मंदिर कमेटी एवं स्थानीय लोगों ने बड़े ही धूमधाम से स्वर्ण जयंती मनाई थी। स्वर्ण जयंती के अवसर पर ही नई संगमरमर की मूर्ति राजस्थान से मंगवाकर स्थापित किया गया था।
यहां हर वर्ष धूमधाम से दुर्गा पूजा का आयोजन किया जाता रहा है। हर साल यहां अष्टमी व नवमी को श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया जाता था, इस साल भी प्रसाद का वितरण किया जाएगा। इस दौरान वैदिक रीति रिवाज से ही मंदिर में पूजा पाठ किया जा रहा है। यहां बलि प्रथा की भी परंपराग है।

