भगवान राम को लगा था ब्राह्मण वध का पाप तब,नीलकंठ पक्षी के रूप में धरती पर पधारे थे भगवान शिव -दशमी को नीलकंठ पक्षी के दर्शन हो जाने से भक्तों का दिन हमेशा रहता व बनते है बिगड़े कार्य

भगवान राम को लगा था ब्राह्मण वध का पाप तब,नीलकंठ पक्षी के रूप में धरती पर पधारे थे भगवान शिव -दशमी को नीलकंठ पक्षी के दर्शन हो जाने से भक्तों का दिन हमेशा रहता व बनते है बिगड़े कार्य

अररिया संवाददाता

 


भगवान राम को लगा था ब्राह्मण वध का पाप तब,नीलकंठ पक्षी के रूप में धरती पर पधारे थे भगवान शिव
-दशमी को नीलकंठ पक्षी के दर्शन हो जाने से भक्तों का दिन हमेशा रहता व बनते है बिगड़े कार्य । नीलकंठ के दर्शन के लिए काली मंदिर में उमड़ी भक्तों के भीड़,

भगवान राम को लगा था ब्राह्मण वध का पाप तब,नीलकंठ पक्षी के रूप में धरती पर पधारे थे भगवान शिव -दशमी को नीलकंठ पक्षी के दर्शन हो जाने से भक्तों का दिन हमेशा रहता व बनते है बिगड़े कार्य
भगवान राम ने विजयादशमी के दिन ही रावण का वध किया था।भगवान राम को ब्राह्मण वध का पाप लगा था। भगवान राम व लक्ष्मण मिलकर भगवान शिव का पूजा- अर्चना किया। पूजा के बाद भगवान शिव नीलकंठ पक्षी के रूप में विजयादशमी के दिन धरती पर आए थे। इस कारण विजयादशमी के पक्षी निलकंठ का दर्शन को शुभ माना जाता है। सालों से मां खड्गेश्वरी महाकाली मंदिर के साधक नानु बाबा द्वारा विजयादशमी दर्जनों निलकंठ उड़ाया जाता है। बुधवार को विश्व प्रसिद्ध मां खड्गेश्वरी काली मंदिर में नीलकंठ का दर्शन के लिए भक्तों की काफी भीड़ देखी गयी। इस दौरान हजारों भक्तों ने नीलकंठ का दर्शन किये। जिसके बाद मां खड्गेश्वरी के साधक नानु बाबा ने नीलकंठ को उड़ा दिये। नानु बाबा ने बताया कि दशहरा के नीलकंठ पक्षी को भगवान का प्रतिनिधि माना गया है। दशहरा पर्व पर इस पक्षी के दर्शन को शुभ  व भाग्य को जगाने वाला माना जाता है। जिसे दशहरे के दिन हर व्यक्ति नीलकंठ का दर्शन करना चाहते है। नीलकंठ पक्षी के दर्शन हो जाने से भक्तों का दिन हमेशा शुभ कार्य बनता रहता है।

इस दिन नीलकंठ के दर्शन होने से घर के धन-धान्य में वृद्धि होती है, व फलदायी व शुभ कार्य घर में अनवरत्‌ होते रहते हैं। बाबा बताते है कि निलकंठ के दर्शन की परंपरा बरसों से जुड़ी है. लंका जीत के बाद जब भगवान राम को ब्राह्मण हत्या का पाप लगा था। भगवान राम ने अपने भाई लक्ष्मण के साथ मिलकर भगवान शिव की पूजा अर्चना की व ब्राह्मण हत्या के पाप से खूद को मुक्त कराया. तब भगवान शिव नीलकंठ पक्षी के रुप में धरती पर पधारे थे। मौके पर शंकर माली,मनोज झा,अखिलेश दास,शशि कांत दुबे,गुड्डू सिंह, विकाश सिंह, अरुण मिश्रा, हीरा,अभय श्रीवास्तव, प्रदीप कुमार,सिंटू कुमार आदि मौजूद थे।

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